हिंदू पंचांग के अनुसार, Ekadashi वर्ष भर में 24 बार आती है, जिनमें प्रत्येक Ekadashi का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। विशेष रूप से नवंबर 2025 की Ekadashi व्रतें भगवान विष्णु को समर्पित हैं, और इनका पालन करने से जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नवंबर 2025 में Ekadashi कब है?
नवंबर 2025 में दो महत्वपूर्ण Ekadashi 2025 पड़ती हैं — आंगारकी Ekadashi और उत्तानपाद Ekadashi। आइए इनके तिथि, पूजा विधि और पारण समय को विस्तार से समझें।
- आंगारकी एकादशी (Angaraki Ekadashi) – यह Ekadashi कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी है।
- उत्तानपाद एकादशी (Uttanpada Ekadashi) – यह Ekadashi कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है।
इन दोनों तिथियों पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तो चलिए, हम इन दोनों एकादशियों की तिथि, समय और महत्व पर गहराई से विचार करते हैं।

आंगारकी एकादशी (नवंबर 2025)
- तिथि: 01 नवंबर 2025 में आंगारकी एकादशी की तिथि है
- पौराणिक महत्व: आंगारकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। कहा जाता है कि आंगारकी (मंगलवार) को पड़ने वाली यह एकादशी बहुत पुण्यदायिनी होती है।
- पूजा का समय: व्रत के दिन प्रभात काल से ही पूजा शुरू की जाती है। आरंभ में हल्का उपवास रखें और मध्याह्न में विष्णु जी की विधिपूर्वक पूजा करें।
- पारण का समय: पारण का समय रविवार-सोमवार पर निर्भर करता है क्योंकि पारण सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण का पक्ष लंबा निपटने से पहले ही किया जाना चाहिए।
उत्तानपाद एकादशी (नवंबर 2025)
- तिथि: 02 नवंबर 2025 में उत्तानपाद एकादशी पड़ती है
- पौराणिक महत्व: उत्तानपाद एकादशी को भी भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति और पापों की नाश करने में सहायक माना जाता है।
- पूजा का समय: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद विष्णु जी की आराधना की जाती है। उपवास के समय में मध्यम भोजन या फल ही लें।
- पारण का समय: इस व्रत का पारण उसी दिन शाम में सूर्यमूंढा से पूर्व करना उत्तम माना जाता है ताकि व्रत उचित रूप से पूरा हो सके।
एकादशी 2025: पूजा विधि और उपाय
व्रत के दिन की पूजा विधि बहुत महत्वपूर्ण होती है। नीचे दी गई विधि से आप सही तरीके से पूजा-अर्चना कर सकते हैं:
- स्वच्छता बनाएँ — व्रत के दिन पूरे घर को स्वच्छ रखें और पूजा स्थल को विशेष रूप से सजाएँ।
- सुबह स्नान — प्रभातकाल में स्नान करके पूजा के लिए तैयार हों।
- विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर — एक साफ और पवित्र स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- समुद्र या गंगाजल का उपयोग — हो सके तो नदी या गंगाजल लाकर चढ़ाएं, अन्यथा पवित्र जल का प्रयोग करें।
- पूजा सामग्री — फूल, नैवेद्य (फल, मिठाई), दीपक, धूप और अक्षत चावल तैयार रखें।
- पूजा मंत्र — “ॐ नमो नारायणाय” या अन्य विष्णु मंत्र का जाप करें।
- व्रत कथा — एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। इससे व्रत का महत्व और बढ़ता है।
- दान देना — भोजन, फल, वस्त्र या जरूरतमंदों को दान देना पुण्य को बढ़ाता है।
- पारण — पारण करते समय हल्का फलाहार या खीर आदि लें, और त्याग के भाव के साथ व्रत खोलें।
एकादशी 2025: व्रत रखने के लाभ
- पुण्य की प्राप्ति — एकादशी व्रत रखने से धर्म और पुण्य की प्राप्ति होती है।
- मन की शांति — ध्यान, पूजा और संयम व्रतकर्ता को मानसिक शांति देते हैं।
- शारीरिक लाभ — व्रत के दौरान हल्का भोजन लेने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
- पापों का नाश — पुराणों में कहा गया है कि एकादशी व्रत पापों को नष्ट करने में मदद करता है।
- आध्यात्मिक उन्नति — नियमित एकादशी व्रत से आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है और आत्मा को शुद्धि मिलती है।
एकादशी 2025: ध्यान देने योग्य बातें
- व्रत के दौरान मांस, मछली, अंडा, मदिरा आदि वर्जित होते हैं।
- यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण व्रत कठिन हो, तो अर्धव्रत या फलाहार व्रत भी किया जा सकता है।
- पूजन के समय सकारात्मक भावना और श्रद्धा बहुत महत्वपूर्ण होती है।
- व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए बिना झूठी और कठोर विचारों के वर्तन करना चाहिए।
- पारण करते समय धीरज और कृतज्ञता का भाव रखें।
निष्कर्ष
नवंबर 2025 में Ekadashi 2025 की दोनों अहम तिथियाँ — आंगारकी और उत्तानपाद एकादशी — व्रत रखने वालों के लिए अत्यंत पुण्यदायिनी हैं। उचित समय पर पूजा, मन में श्रद्धा और नियंत्रण के साथ व्रत रखने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होते हैं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार आता है।

यदि आप एकादशी 2025 का व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो ऊपर बताए गए पूजा समय, पारण विधि और सावधानियों का पालन अवश्य करें। यह न केवल आपकी धार्मिक आस्था को सशक्त करेगा, बल्कि आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी लाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Google FAQ)
प्रश्न 1: 2025 में नवंबर महीने में एकादशी कितनी है?
उत्तर: नवंबर 2025 में दो एकादशी हैं — आंगारकी एकादशी और उत्तानपाद एकादशी।
प्रश्न 2: एकादशी 2025 के दौरान पारण का सही समय क्या है?
उत्तर: पारण का समय उस दिन की सूर्योदय और संध्या के आधार पर निर्धारित होता है। आंगारकी एकादशी में शाम को सूर्यमूढ़ा से पहले पारण करना उत्तम माना जाता है।
प्रश्न 3: यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो क्या एकादशी 2025 का व्रत रखना चाहिए?
उत्तर: हाँ, यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो अर्धव्रत या फलाहार व्रत किया जा सकता है। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
प्रश्न 4: एकादशी 2025 व्रत के लाभ क्या हैं?
उत्तर: एकादशी व्रत रखने से पुण्य की प्राप्ति, मानसिक शांति, पापों का नाश, और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
प्रश्न 5: एकादशी 2025 के पूजा मंत्र क्या हो सकते हैं?
उत्तर: सामान्य मंत्र “ॐ नमो नारायणाय” का जाप किया जाता है, साथ ही आप विष्णु स्तुति, भजन या एकादशी कथा भी पढ़ सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. jagrukmanch इसकी पुष्टि नहीं करता है.)








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